जमाबंदी सुधार: 45 दिन का अभियान और अपील का रास्ता
जमाबंदी में खाता, खेसरा, प्लॉट संख्या या रैयत का नाम गलत दर्ज हो जाए तो उसे सुधारने के दो रास्ते हैं — विभाग का विशेष अभियान, और रैयत का अपना आवेदन। सितंबर 2026 में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसी त्रुटियों के लिए 45 दिन का विशेष अभियान चलाने की घोषणा की, जिसमें जरूरत पड़ने पर जमीन की मापी मुफ्त कराने की बात कही गई।
नीचे दोनों रास्ते, अपील की पूरी सीढ़ी और अपने गाँव की स्थिति खुद जाँचने का तरीका दिया गया है।
जमाबंदी में आमतौर पर कौन-सी गलतियाँ मिलती हैं
- खाता या खेसरा संख्या का गलत दर्ज होना
- प्लॉट संख्या का मेल न खाना
- रैयत या पिता के नाम की वर्तनी गलत होना
- पुरानी और डिजिटल जमाबंदी के आँकड़ों में अंतर
- मृत रैयत के नाम पर वर्षों से चली आ रही जमाबंदी
इनमें से ज्यादातर गलतियाँ तब सामने आती हैं जब कोई जमीन बेचता है, दाखिल-खारिज कराता है या सर्वे में कागज जमा करता है। तब तक रिकॉर्ड में पड़ी रहती हैं।
45 दिन का विशेष अभियान: 11 सितंबर 2026 की घोषणा
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने 11 सितंबर 2026 को पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में अपर समाहर्ता (राजस्व) की समीक्षा बैठक में यह घोषणा की। बैठक में तय हुआ:
- जमाबंदियों के शुद्धिकरण के लिए 45 दिवसीय विशेष अभियान चलेगा
- खाता, खेसरा, प्लॉट और रैयत के नाम की त्रुटियाँ इसी दौरान दूर होंगी
- मापी की जरूरत पड़ने पर संबंधित भूमि की मुफ्त मापी होगी
- अभियान की जिम्मेदारी अंचल अधिकारियों पर रहेगी
- अरवल, जहानाबाद, शेखपुरा, शिवहर और लखीसराय के एक हजार से अधिक गाँवों का नोटिफिकेशन किया जाएगा
- नोटिफिकेशन के तीन माह के भीतर एडीएम कोर्ट में अपील का प्रावधान रहेगा, जिसके लिए अलग सर्वे अपील प्रकोष्ठ बनेगा
- नए सर्वे वाले जिलों में स्पेशल म्यूटेशन शुरू होगा, जिसमें जमीन के विवरण के साथ नक्शा भी रहेगा
घोषणा के समय गाँवों की सूची जारी नहीं हुई थी। इसलिए किसी वेबसाइट पर दी गई सूची पर भरोसा करने के बजाय स्थिति खुद जाँचना बेहतर है।
अपने गाँव की स्थिति खुद कैसे जाँचें
यह तरीका अभियान की तारीख से बँधा नहीं है, किसी भी समय काम करता है।
- dlrs.bihar.gov.in की सेवाओं में “अपने ग्राम/शहर में विशेष सर्वेक्षण की स्थिति देखें” विकल्प से अपने गाँव का चरण देखें।
- अंचल कार्यालय में हलका कर्मचारी से पूछें कि आपके मौजा का नोटिफिकेशन हुआ है या नहीं।
- नोटिफिकेशन हो चुका हो तो तारीख नोट कर लें — अपील की समय-सीमा उसी दिन से गिनी जाती है।
मुफ्त मापी किस दायरे में
मुफ्त मापी की बात अभियान के भीतर कही गई — यानी जहाँ जमाबंदी की त्रुटि सुधारने के लिए मापी जरूरी हो। यह हर रैयत के लिए खुली सामान्य सुविधा नहीं है। अभियान से बाहर की मापी पर सामान्य नियम ही लागू रहते हैं।
अपील का पूरा रास्ता
यहाँ दो अलग व्यवस्थाएँ हैं और इन्हें मिलाना नहीं चाहिए।
सर्वे नोटिफिकेशन से जुड़ी अपील — नोटिफिकेशन जारी होने के तीन माह के भीतर एडीएम न्यायालय में। इसके लिए अलग सर्वे अपील प्रकोष्ठ बनाने की बात कही गई है।
दाखिल-खारिज से जुड़ी अपील — यह स्थायी व्यवस्था है और अभियान से नहीं बदलती। विभाग के आधिकारिक FAQ के अनुसार:
- दाखिल-खारिज आदेश से असंतुष्ट पक्ष 30 दिन के भीतर भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के यहाँ अपील वाद दायर कर सकता है
- 30 दिन बीत जाएँ तो अपील के साथ विलंब माफी याचिका लगानी होती है, जिस पर उप समाहर्ता गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेते हैं
- उप समाहर्ता के आदेश से असंतुष्टि पर समाहर्ता या अपर समाहर्ता के न्यायालय में पुनरीक्षण वाद
- उसके बाद बिहार भूमि न्यायाधिकरण का रास्ता
स्पेशल म्यूटेशन क्या है
यह सामान्य दाखिल-खारिज से अलग व्यवस्था है। रोजमर्रा के नामांतरण पर दाखिल-खारिज का ₹200 शुल्क ही लागू होता है। स्पेशल म्यूटेशन के लिए अलग शुल्क की कोई घोषणा नहीं हुई है।
अंचल स्तर पर किन कामों पर जोर है
सचिव जय सिंह ने 10 सितंबर 2026 को बेगूसराय, मधुबनी और जमुई के अंचल अधिकारियों की समीक्षा में जो निर्देश दिए, वे बताते हैं कि अंचल में किन मामलों को प्राथमिकता मिल रही है:
- जमाबंदी की गलतियाँ ठीक करने के लिए मौजा-वार अभियान
- पाँच एकड़ से अधिक सरकारी जमीन का भौतिक सत्यापन और सरकारी प्लॉट से जुड़ी जमाबंदियों की जाँच
- लॉक की गई जमाबंदियों को नियम के अनुसार अनलॉक करना
- मृत रैयतों की जमाबंदी पर स्वतः संज्ञान लेकर उत्तराधिकार और बंटवारा नामांतरण
- दाखिल-खारिज आवेदन में गलत प्रश्नावली भरने वालों को नोटिस, और जाली दस्तावेज के मामलों में प्राथमिकी पर निगरानी
आखिरी बिंदु आवेदकों के लिए सीधा संकेत है। प्रश्नावली में गलत जानकारी का नतीजा अब सिर्फ आवेदन खारिज होना नहीं रहता।
अभियान का इंतजार किए बिना क्या करें
जिनका गाँव इन पाँच जिलों में नहीं है, उनके लिए जमाबंदी सुधार का रास्ता पहले से खुला है। परिमार्जन प्लस के जरिए biharbhumi.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन से पहले अपनी जमाबंदी पंजी और भू-अभिलेख मिलाकर देख लें कि गलती रिकॉर्ड में है या सिर्फ प्रिंट में — दोनों का इलाज अलग है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अभियान की तारीख क्या है?
घोषणा के समय शुरुआत की तिथि नहीं बताई गई थी। अपने अंचल कार्यालय से पुष्टि करें।
मेरा गाँव इसमें है या नहीं?
सूची नोटिफिकेशन के साथ आती है। dlrs.bihar.gov.in पर अपने गाँव का सर्वेक्षण चरण देखा जा सकता है।
मापी का पैसा लगेगा?
अभियान के तहत जहाँ मापी जरूरी होगी, वहाँ मुफ्त कही गई है। इसके बाहर सामान्य नियम लागू रहते हैं।
अपील कहाँ होगी?
नोटिफिकेशन से जुड़ी अपील एडीएम न्यायालय में तीन माह के भीतर। दाखिल-खारिज की अपील भूमि सुधार उप समाहर्ता के यहाँ 30 दिन में।
स्पेशल म्यूटेशन आम दाखिल-खारिज से कैसे अलग है?
इसमें जमीन के विवरण के साथ नक्शा भी मिलता है। यह नए सर्वे वाले जिलों के लिए घोषित हुआ है।
आधिकारिक स्रोत
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार — दाखिल-खारिज और अपील संबंधी आधिकारिक FAQ
यह जानकारी 14 सितंबर 2026 तक विभाग की ओर से की गई घोषणाओं पर आधारित है। नोटिफिकेशन और समय-सीमा की ताजा स्थिति अपने अंचल कार्यालय या dlrs.bihar.gov.in से जाँच लें। भूमि से जुड़ी अन्य खबरों के लिए लेटेस्ट न्यूज़ सेक्शन देखें।



