दाखिल-खारिज नया ₹200 शुल्क: पूरा नियम समझें
बिहार में जमीन का दाखिल-खारिज अब तक एक भी रुपये सरकारी शुल्क के बिना होता आया है। यह बदलने जा रहा है। 21 जुलाई 2026 को विधानसभा ने बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जिसके तहत हर म्यूटेशन पर ₹200 शुल्क तय किया गया है।
पर यहीं एक बात साफ समझ लेना जरूरी है — विधेयक पारित होना और कानून लागू होना, दोनों अलग चीजें हैं।
आज की असल स्थिति (जाँच तिथि: 12 अगस्त 2026)
| स्थिति | विवरण |
|---|---|
| पारित | 21 जुलाई 2026, विधानसभा, मानसून सत्र |
| पेश किया | राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल |
| लंबित | राज्यपाल की स्वीकृति और राजपत्र अधिसूचना |
| आज शुल्क | अधिसूचना जारी होने तक विभागीय शुल्क लागू नहीं |
बिहार भूमि पोर्टल के आधिकारिक FAQ में दाखिल-खारिज को अब भी निःशुल्क बताया गया है। जिस दिन वह पंक्ति बदलेगी, समझ लीजिए अधिसूचना आ चुकी है।
वह बात जो लगभग हर खबर में छूट गई
शुल्क सिर्फ नए आवेदन पर नहीं लगेगा।
सदन में रखे गए प्रावधान के मुताबिक हर दाखिल-खारिज आवेदन के साथ-साथ अपील वाद और पुनरीक्षण याचिका पर भी निर्धारित शुल्क देय होगा।
इसका मतलब सीधा है — अंचल अधिकारी के आदेश से असहमत होकर भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के यहाँ अपील, और उसके बाद समाहर्ता के न्यायालय में पुनरीक्षण, दोनों चरण भी शुल्क के दायरे में आएँगे। जिनका मामला पहले ही उलझा हुआ है, असर उन पर सबसे ज्यादा पड़ेगा।
किस कानून में संशोधन हुआ
मूल कानून है बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 (बिहार अधिनियम 23, 2011) और उसके तहत बनी बिहार भूमि दाखिल-खारिज नियमावली, 2012, जिसमें 2017 और 2020 में पहले भी संशोधन हो चुके हैं।
सदन में मंत्री का तर्क था कि विभागीय बैठकों में यह महसूस किया गया कि इन प्रक्रियाओं के लिए नाममात्र शुल्क तय होना चाहिए। विपक्ष ने इसे आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ बताया, जिस पर मंत्री का जवाब था कि सरकार खुद भूमिहीन परिवारों को तीन डिसमिल जमीन दे रही है।
जो अभी तय नहीं है — और कोई वेबसाइट यह नहीं बताएगी
अधिसूचना आने से पहले इन चार सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है:
- शुल्क किस तारीख से वसूला जाएगा
- भुगतान पोर्टल से होगा या अंचल स्तर पर चालान से
- जो आवेदन पहले से लंबित हैं, उन पर लागू होगा या नहीं
- विरासत या बटवारे जैसे मामलों में कोई छूट मिलेगी या नहीं
अगर कोई साइट आपको इनकी पक्की तारीख या प्रक्रिया बता रही है, वह अनुमान है — अधिसूचना नहीं।
₹200 और “बिचौलिये का रेट” एक चीज नहीं
यह ध्यान रखें: ₹200 सरकारी शुल्क होगा, जिसकी रसीद व्यवस्था अधिसूचना में तय होगी। सेवा केंद्र या वसुधा केंद्र पर टाइपिंग, स्कैनिंग और अपलोड का चार्ज इससे अलग है।
आवेदन ऑनलाइन है और अपने ही लॉगिन से किया जाना चाहिए — इसलिए कोई इस बदलाव का हवाला देकर हजारों रुपये माँगे तो वह शुल्क नहीं, वसूली है। ऐसे में अंचल कार्यालय या लोक शिकायत निवारण में शिकायत का रास्ता खुला है।
अभी आपको क्या करना चाहिए
अगर आपकी रजिस्ट्री हाल में हुई है, आवेदन टालिए मत। कानून पहले से कहता है कि अधिकार मिलने के 90 दिनों के भीतर दाखिल-खारिज का आवेदन देना चाहिए, वरना विलंब माफी याचिका लगानी पड़ती है।
अधिसूचना से पहले जमा आवेदनों पर शुल्क लागू होगा या नहीं, यह अधिसूचना की भाषा तय करेगी। ऐसे में देर न करना ही समझदारी है।
आवेदन की पूरी प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और स्थिति जाँचने का तरीका Bihar Bhumi की मुख्य गाइड में विस्तार से दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ₹200 शुल्क अभी लागू हो गया है?
नहीं। विधेयक पारित हो चुका है, पर राज्यपाल की स्वीकृति और राजपत्र अधिसूचना के बाद ही यह प्रभावी होगा।
पहले दाखिल-खारिज का कितना शुल्क था?
कोई नहीं। विभाग के आधिकारिक FAQ के अनुसार यह प्रक्रिया अब तक पूरी तरह निःशुल्क रही है।
क्या अपील पर भी पैसा लगेगा?
संशोधन के अनुसार आवेदन के अलावा अपील और पुनरीक्षण याचिका भी शुल्क के दायरे में आएँगी।
क्या यह शुल्क रजिस्ट्री या स्टांप ड्यूटी में शामिल है?
नहीं। रजिस्ट्री के समय लगने वाला स्टांप और निबंधन शुल्क अलग है; दाखिल-खारिज उसके बाद की अलग प्रक्रिया है।
अपडेट लॉग — 12 अगस्त 2026: विधेयक पारित, अधिसूचना प्रतीक्षित। स्थिति बदलते ही यह पेज अपडेट किया जाएगा।

