बिहार रजिस्ट्री नए नियम: 13 जरूरी जानकारी लिस्ट
बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए 11 जुलाई 2026 से एक नई व्यवस्था चालू है। ई-निबंधन पोर्टल पर खरीदार जमीन की 13 जानकारियां भरता है, और अंचल अधिकारी 10 दिनों के भीतर उस जमीन की अद्यतन सरकारी स्थिति ऑनलाइन देते हैं।
खबरों में इसे “अब बिना CO जांच रजिस्ट्री नहीं होगी” कहा जा रहा है। असल नियम इससे अलग है, और यही फर्क समझना सबसे जरूरी है।
जांच रोक नहीं, विकल्प है
पोर्टल पर विवरण भरने के बाद एक सवाल आता है — क्या आप जमीन की अद्यतन जानकारी चाहते हैं?
- हाँ चुना: आवेदन अपने आप संबंधित अंचल अधिकारी और राजस्व कर्मचारी के लॉगिन में चला जाता है, दोनों पक्षों को SMS जाता है।
- नहीं चुना: निबंधन कार्यालय पहले की तरह सामान्य प्रक्रिया से दस्तावेज का निबंधन कर देता है।
यानी यह खरीदार को मिली सुरक्षा है, रजिस्ट्री पर लगी रोक नहीं। न चुनने पर रजिस्ट्री रुकेगी नहीं — पर जमीन की सरकारी स्थिति की पुष्टि भी नहीं मिलेगी।
यह सुविधा फिलहाल रैयती भूमि पर लागू है।
10 दिन बीत गए तो?
अगर अंचल अधिकारी तय 10 दिनों में रिपोर्ट अपलोड नहीं करते, तो आवेदक की दी हुई जानकारी ही पूर्ण मानी जाती है और आवेदन आगे बढ़ जाता है। खरीदार का काम अफसर की देरी पर अटकता नहीं।
इसे लागू कराने के लिए उप निबंधन महानिरीक्षक संजय कुमार ने विभाग को निर्देश भेजे हैं। सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर उनकी यूजर आईडी सक्रिय की जा चुकी है।
पूरी 13 जानकारियों की सूची
कई जगह यह सूची अधूरी छपी है। पूरी सूची और हर जानकारी का स्रोत नीचे है:
| # | जानकारी | कहाँ से लें |
|---|---|---|
| 1 | निबंधन कार्यालय का नाम | जिस अवर निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री होनी है |
| 2 | अंचल | जमीन का अंचल, केवला या जमाबंदी से |
| 3 | मौजा | जमाबंदी पंजी-II |
| 4 | थाना संख्या | खतियान या जमाबंदी |
| 5 | खाता संख्या | जमाबंदी पंजी-II |
| 6 | खेसरा संख्या | जमाबंदी और भू-नक्शा |
| 7 | रकबा | जमाबंदी में दर्ज रकबा |
| 8 | चौहद्दी | भू-नक्शा और मौके की स्थिति |
| 9 | जमाबंदी संख्या | जमाबंदी पंजी-II |
| 10 | जमाबंदी धारक का नाम | जमाबंदी पंजी-II |
| 11 | क्रेता का नाम | आपका पहचान पत्र |
| 12 | विक्रेता का नाम | विक्रेता का पहचान पत्र |
| 13 | भूमि का प्रकार | जमाबंदी में दर्ज किस्म — कृषि, आवासीय या व्यावसायिक |
किस बेमेल पर रुक जाना चाहिए
भरते समय जो अंतर दिखे, वही असली चेतावनी है:
- जमाबंदी धारक का नाम विक्रेता से अलग है — जमीन अब भी किसी और के नाम दर्ज है। बिना वंशावली और सभी हिस्सेदारों की सहमति के आगे न बढ़ें।
- रकबा केवला और जमाबंदी में अलग — बाद में दाखिल-खारिज में यही सबसे बड़ी अड़चन बनता है।
- खेसरा नक्शे में नहीं मिल रहा — नंबर गलत है या रिकॉर्ड अपडेट नहीं।
- भूमि का प्रकार अलग — कृषि जमीन को आवासीय बताकर बेचना आम शिकायत है।
रिपोर्ट में विवाद दिखे तो
- रिपोर्ट का काम यह बताना है कि जमीन पर कोई विवाद, भार या कानूनी अड़चन दर्ज है या नहीं। यह मालिकाना हक का प्रमाणपत्र नहीं है।
- कुछ भी संदिग्ध दिखे तो रजिस्ट्री की तारीख टालिए। रजिस्ट्री हो जाने के बाद पैसा वापस लेना मुश्किल होता है, जबकि तारीख टालना आसान है।
- एक ही जमीन दो लोगों को बेच देने के मामले इसी चरण पर पकड़े जाते हैं।
समय का हिसाब लगाकर चलें
रिपोर्ट में 10 दिन लगते हैं, इसलिए आवेदन रजिस्ट्री की तय तारीख से कम से कम दो हफ्ते पहले करें।
रजिस्ट्री के बाद असली काम दाखिल-खारिज है, जिसकी लागत भी अब बदल रही है — देखें दाखिल-खारिज नया ₹200 शुल्क। खाता, खेसरा और जमाबंदी देखने का तरीका Bihar Bhumi गाइड में दिया गया है।
सवाल-जवाब
क्या 13 जानकारी भरना अनिवार्य है?
अद्यतन जानकारी का विकल्प चुनने पर ये विवरण देने होते हैं। विकल्प न चुनने पर निबंधन पहले की तरह होता है।
यह कब से लागू है?
11 जुलाई 2026 से।
क्या इसका कोई शुल्क है?
अभी तक इस जांच के लिए कोई अलग शुल्क सामने नहीं आया है।
क्या यह हर जमीन पर लागू है?
यह सुविधा रैयती भूमि के लिए बताई गई है।

